देश के सबसे बड़े राज्य की सरकार में लोकतन्त्र के चौथे स्तभ मीडिया को अपने कर्तव्य पालन से रोका -निराले रंग

लोकतन्त्र के चौथे स्तभ मीडिया को अपने कर्तव्य पालन से रोका

लोकतन्त्र के चौथे स्तभ मीडिया को अपने कर्तव्य पालन से रोका

देश के सबसे बड़े राज्य की सरकार में लोकतन्त्र के चौथे स्तभ मीडिया को अपने कर्तव्य पालन से रोका -निराले रंग 

भारत एक लोकतन्त्र से बना देश है जो भारतीय सविधान के आनुसार चलता है, यहाँ हमेशा से ही लोकतंत्र द्वारा सरकार चुनी जाती है. और सरकार को चलाने का काम जनता के नुमाइन्डो एवं प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा होता है.
 
अब हम असल मुद्दे पर आते है,  कैसे उत्तर प्रदेश सरकार का लापरवाही भरा मुद्दा जो आज कल मिडिया में चल रहा है. थोडा इस केस पर प्रकाश डालते है, क्या था ये मामला -उत्तर प्रदेश के एक गाँव में एक लड़की के साथ बलात्कार होता है, लड़की की हालत बहुत ही गंभीर होती है, लड़की की रीड की हड्डी अपराधियों ने थोड़ दी, उसके जीभ भी काट दी, उसे उत्तर प्रदेश के एक हॉस्पिटल में एडमिट करवाया जाता है, उसकी हालत और भी ख़राब होती है जिसके कारण उसे दिल्ली के सफ़दरजन अस्पताल में भर्ती करवाया गया. 
 

लोकल मीडिया से नेशनल मीडिया में चलने लगी ख़बरे 

धीरे-धीरे इस मामले का खबर लोकल मीडिया से नेशनल मीडिया में चलने लगी, और ये खबर पुरे भारत में वायरल होने लगी, मामले में विभिन्न सामाजिक एवं राजनितिक पार्टियों ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार को घेरने लगे. पर सरकार को घेरने का कारण कुछ और ही था, पहले को पीड़ित परिवार की उत्तर प्रदेश पुलिस ने केस दर्ज नही किया. बाद में आपराधियो का साथ दिया और पीड़ित परिवार को पुलिस और जिला कलेक्टर ने  धमकाया, डराया और समझोता करने के लिए दबाव बनाया. लेकिन पीड़ित परिवार दबाव में नही आया. 
 
      फिर मामले में मोड़ ये आया की पीडिता में सफदरजंन हॉस्पिटल में दम थोड़ दिया, परिवार की बिना इजाज़त दलित पीड़िता का शव सफ़दरजन हॉस्पिटल से उत्तर प्रदेश पुलिस पीडिता के गाँव ले गयी. शव को रात को 2 बजे भारी पुलिस बल के साथ बिना परिवार के पुलिस ने शव को पैट्रोल के साथ अंतिम संस्कार कर दिया. पीड़िता का परिवार शव का इन्तजार हॉस्पिटल में करता रहा. जब हॉस्पिटल के बहार सामाजित संस्थानों और राजनैतिक पार्टियों के लोगो को पता चला तो हगामा हो गया अलग अलग लोगो की प्रतिक्रियाये आयी.   

जब पुरे देश में हुयी चर्चा

   पुरे देश में इसी मामले की चर्चा हो रही थी. लोगो के एक दिन के लिए पीडिता को न्याय दिलाने के लिए अपने कार्य का बहिष्कार कर भारत बंद रखा. पीडिता के गाँव के बहार लोगो ने प्रदर्शन करने शुरू कर दिया. विभिन्न मीडिया संस्थान ने पीडिता को न्याय दिलाने के लिए पीड़ित परिवार से बात करनी चाही तो मीडिया को भी उत्तर प्रदेश पुलिस  ने रोका. पीड़ित परिवार को सुरक्षा के नाम पर 150-200 पुलिसकर्मियों ने बंधक बनाया मिडिया से मिलने नही दिया. 
       

महिला रिपोर्टर को पीड़ित परिवार से मिलने के लिए रोका गया

      भारत के प्रसिद्ध टीवी मीडिया चैनल्स भारत समाचार लगातार शुरूआत से इस मामले की कवरेज कर रहा था ख़ास कर सबसे पहले abp न्यूज़ के महिला रिपोर्टर को पीड़ित परिवार से मिलने के लिए रोका गया. बाद में आजतक न्यूज़ चैनल की महिला पत्रकार से भी हातरस के एसडीएम ने बदसलूकी की पत्रकार ने लाइव टीवी पर ही एसडीएम को बताया की आप ये क्या कर रहे है. आपको तो मीडिया का साथ देना चाहिए उल्टा आप मीडिया को पीड़ित परिवार से मिलाने से रोक रहे है. 

लोकतंत्र की रीड की हड्डी मिडिया है 

  किसी भी लोकतंत्र की रीड की हड्डी मिडिया है कभी कभी मिडिया पर भी सरकार के पक्ष में ही रिपोर्ट करने का रवैया रहा है लेकिन जब मीडिया सरकार और अपराधियों के विरोध में रिपोर्ट करे तो इसको प्रशासन द्वारा रोकने का ये पहला मामला दिखाई दे रहा है.  

     
  

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